अघोरी शमशान में तीन प्रकार की साधना करते हैं जो की शिवस्वरूप को ही समर्पित होती है.

अघोरी शमशान में तीन प्रकार की साधना करते हैं जो की शिवस्वरूप को ही समर्पित होती है.

अघोरी बाबाओं की अनजानी बातें

दुनिया भर में आज भी भारत के अघोर समाज यानि “अघोरियों” को लेकर काफी ज्यादा रिसर्च करी जाती है और अघोरियों के बारे में जानना और पढना आजकल एक चर्चित विषय बन रहा है. हजारों की संख्या में भारत में हर वर्ष अघोरियों की तलाश में शोधार्थी आते है और अपनी स्टडी के लिए अघोरियों के समाज से मिलने की इच्छा रखते है.

अघोरियो के बारे में कहा जाता है कि ये लोग आम सामाजिक जीवन से अलग-थलग रहते है और दोपहर या दिन दहाड़े किसी भी आम इन्सान के सामने नहीं आते. आमतौर अधोरी बाबा रात के समय में ही अपनी गुफाओं या जहाँ भी वो रहते है वहां से बहार आते है. कहा जाता है की अघोरियों के आस पास अद्भुर अद्रश्य शाक्तियों का वास होता है जिसका प्रयोग अघोरी समाज अपनी साधना के प्रयोग के लिए करते है. तो यह बात से अंदाज़ा लगाया जा सकता है की अघोरी लोग यूँ ही किसी के भी सामने नहीं आते.

कहा जाता है की अघोरी लोगों का क्रोध और आशीर्वाद दोनों ही तुरंत फलित होता है इसलिए स्वयं अघोरी बाबा भी किसी से इतनी आसानी से नहीं मिलते और किसी पर अगर इन्होको क्रोध आ जाता है. तो ये उनको तुरंत अपने क्रोध से दंड देने में भी नहीं चुकते. और वही अगर किसी व्यक्ति से ये लोग खुश हो जाये तो उनको तुरंत अपनी सिद्ध शक्ति से मनमांगी इच्छा पूर्ति का आशीर्वाद भी दे देते है.

अघोरियों का सम्पूर्ण समाज सिर्फ और सिर्फ शिव भक्ति और शिव शक्ति के अघोर रूप की उपासना करता है. और स्वयं अगर भगवान शिव की बात करें तो खुद भगवन शिव का ये स्वरुप समाज से अलग थलग शमशान में ही निवास करता है और यही वजह है की शिव भक्तों को भी शिव के इस स्वरुप की उपासना करने के लिए शमशान में समाजिक जीवन से दूर रह कर अपनी भक्ति करनी पड़ती है.

वेसे इस बात का पूरी तरह से अनुमान लगाना उच्चित नहीं होगा क्योकि कुछ लोगो का कहना है की अघोरी लोग मानव मास का सेवन करते है और अपनी शमशान की साधना करने के लिए मानव शरीर का प्रयोग करते हैं और ये मानव शरीर अघोरी शमशान में जलती चिता से प्राप्त करते है. या बच्चों के शवों तथा उन लोगो के शव को लेते हैं जिनको जलाया नहींजाता और पानी में बहा दिया जाता है उन लोगो के शवों को अघोरी लोग अपनी साधना के लिए प्रयोग करते है.

अघोरी शमशान में तीन प्रकार की साधना करते हैं जो की शिवस्वरूप को ही समर्पित होती है क्रमशा: शमशान साधना, शिव साधन और आखरी शव साधना इस तरह से अघोरी लोग अपनी साधना को पूर्ण करते है. और कहा जाता है की अगर कोई इनकी साधना के बीच आम व्यक्ति पहुच जाता है तो उसको इनके क्रोध का भागी बनना बड़ता है.

अघोर समाज के तीन शाखाये प्रसिद्ध हुई है:-

औघड, सरभंगी, घुरे इनमे से पहेली शाखा में कल्लुसिंह एवं कालूराम हुए थे जो की किनाराम बाबा के गुरु हुए थे वही कुछ लोगो का मानना है की ये बाबा गोरखनाथ से भी पहले का समाज था. और इनका सम्बन्ध शिव मत के पाशुपती एवं कालमुख सम्प्रदाय के साथ जोड़ा जाता है. और यह भी कहा जाता है की अघोर समाज उस समय से आज तक एक ही सिद्धि को करते आये है जिसमे कोई भी बदलाव नहीं लाया गया है.