महाभारत के अश्वत्थामा की जन्म भूमि है टपकेश्वर मंदिर देहरादून.

महाभारत के अश्वत्थामा की जन्म भूमि है टपकेश्वर मंदिर देहरादून.

महाभारत के शापित अश्वत्थामा की जन्मभूमी है टपकेश्वर मंदिर, देहरादून में स्तिथ है ये मंदिर जिसमे छुपी है कई सारी गाथा.

टपकेश्वर मंदिर वही मन्दिर है जहां महाभारत के महान पात्र अश्वत्थामा का जन्म हुआ था. यह मन्दिर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से साथ किलोमीटर की दूरी पर स्तिथ है जो भगवान शिव को समर्पित है. कहा जाता है कि अश्वथामा के माता-पिता द्रोणाचार्य और कृपी की तपस्या से खुश होकर भगवान शिव ने दोनों को अपने दर्शन दिए थे. जिसके बाद दोनों को पुत्र की प्राप्ति हुई थी और अश्वत्थामा का जन्म हुआ था.

टपकेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है लेकिन इस जगह का नाम टपकेश्वर इसलिए पड़ा क्योकि जिस गुफा में भगवान शिव का लिंग है उस गुफा में प्राकृतिक रूप से पानी की बुँदे आज भी टपकती है और शिवलिंग के ऊपर स्वयं प्राकृतिक तौर पर जलाभिषेक होता रहेता है. कहा जाता है की सतयुग में वहां पर दूध की धारा निकला करती थी लेकिन कलयुग आते आते वह पानी में परिवर्तित हो गई. इसलिए इसका नाम टपकेश्वर पड़ा. टपकेश्वर मंदिर टोंस नदी के किनारे बसा हुआ है. हर साल देश भर से श्रद्धालु यहाँ भगवान शिव के दर्शन करने आते हैं.

गुफा से दूध की धरा निकलने पर भी एक पौराणिक गाथा छुपी हुई है. कहा जाता है की एक बार अश्वत्थामा ने अपनी माता से दूध पिने की जिद करी घर में दूध न होने के कारण निराशा से अश्वत्थामा ने भगवान शिव की बालकपन में पूजा करी और भगवान शिव ने अश्वत्थामा की तपश्या से खुश हो कर गुफा से दूध की धारा बहा दी थी. और अश्वत्थामा को एक कामधेनु गाये भी उपहर में दी थी और कहा जिस रूज़ तुम इस गाये को चारा नहीं खिला पाओगे तो उस दिन ये गाये दूध ज्यादा देगी.

तो इस तरह कुछ पौराणिक गाथा है जो टपकेश्वर मंदिर की अपनी खास विशेषता है. लेकिन मनुष्य ने विकास की राह में ख़ुद को भागी बनाया और परम्पराओं को तोड़ता गया. जिस गुफा में शिवलिंग स्तिथ है उस गुफा में पानी निरंतर टपकता रहेता था. जिसको वाटर-प्रूफ पेंट कर के प्रकर्ति से छेड़-छाड़ कर अब सिर्फ भगवान शिव के लिंग के उपर ही मात्र पानी की एक बूंद ही टपकती नज़र आती है.

यदि आप देहरादून जाने की सोच रहें हैं तो टपकेश्वर मंदिर में भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने ज़रूर जाएँ. यह देहरादून स्तिथ TSBT से गढ़ी-केंट के लिए आपको लोकल रिक्शा मिलेगा जिसको आप देहरादून स्थित बल्लुपुर से भी प्राप्त कर सकतें हैं. जो आपको सीधा टपकेश्वर मंदिर के प्रवेश द्वार तक ले जायेगा.

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