कहाँ से आया ये जादू-टोना, जाने अघोरी बाबा अप-डेट के साथ.

कहाँ से आया ये जादू-टोना, जाने अघोरी बाबा अप-डेट के साथ.

यदि आप इस दुनिया में जीवित वस्तुवों पर यकीन रखते हैं जैसे की इन्सान के जीने और मरने की गतिविधि पर और आत्माओं पर या भुत-प्रेतों पर तो यक़ीनन ये लेख आपको शायद ये समझा पाए कि ये सभी इस ही संसार के जीव हैं जो मनुष्य के साथ ही रहते हैं परन्तु दिखाई नहीं देते. तो चलिए दोस्तों आज हम बात करते हैं की आखिर क्या सच में होते है भुत-प्रेत और जादू टोना या यूँ कहू तो कहाँ से आया ये सभी का ज्ञान मनुष्यों को.

हजारो और लाखों साल पहले जब हमारी धरती बन रही थी तो एक उर्जा का जन्म हुआ था जिससे दुनिया में जीवन का अस्तित्व आया. उसी उर्जा को शिव, परमात्मा, ज्ञान, या ईश्वर के नाम से जाना जाता है आज तक. यूँ तो भगवान शिव के लाखो स्वरुप इस धरती पर आपको देखने और सुनने को मिल जाएँगे और जो यकीन कर ले उसके लिए ईश्वर कि मौजूदगी है और जो यकीन न करे उसके लिए कुछ भी नहीं. और दोस्तों आप इस बात से तो अब इंकार भी नहीं कर सकते कि हमारा विज्ञानं भी अब आत्माओं पर यकीन करता है.

भगवान् शिव को भूतेश्वर, परमेश्वर, महाकाल, भद्रकाल आदि नामों से पुकारा जाता है और हाँ यह बात भी सच है की भूतों के राजा "बेताल" भी शिव का ही स्वरुप है. वही शिव के "काल-भैरव" स्वरुप को जादू-टोने और तंत्र-मन्त्र विद्या के लिए पूजा जाता है. जिसका उल्लेख वेदों और पुराणों में भी मिलता है. तो यह बात तो साफ है कि हमारी दुनिया को बनाने वाले परमात्मा से ही मनुष्य को तंत्र-मन्त्र विद्या का ज्ञान प्राप्त हुआ है. और यह विद्या लाखो साल पुरानी विद्या है. जिसको हमारे पूर्वज, ऋषि-महाराज और साधू संत लोक-कल्याण के लिए सामान्य जीवन में प्रयोग में लाते थे.

कहा जाता है कि जो लोग अपनी उम्र से पहले आत्महत्या कर लेते हैं या खुद को म्रत्यु के हवाले करते हैं. उन लोगो को दुनिया में ही रहना पड़ता है वो भी अपने अदृश्य स्वरुप के साथ. और अपना जीवन काल पूर्ण कर के ही दुनिया से मुक्ति मिलती है. जिहों को मानव जीवन में प्रेत-आत्माओं का नाम दिया जाता है.जीवीत संसार में अघोरिओं को ही एक ऐसा बलशाली प्राणी समझा जाता है जो जिंदा होने के बावजूद भी मर्त व्यक्ति से बात भी कर सकते हैं. परन्तु यह सब जप-तप के बाद से ही हासिल किया जाता है. जिसके लिए कुछ खास सिधी क्रियाओं को किया जाता है.

हालाँकि आम इंसान भी इस साधना को आसानी से कर सकता है परन्तु इस के लिए धेर्य और कड़ी साधना करनी पड़ती है जिसके लिए मोह-माया का बंधन त्याग कर अपनी साधना में विलीन होना पड़ता है और आम तौर पर ऐसा कर पाना संभव नहीं हो पता एक आम आदमी के लिए. इसलिए बिना पुरे ज्ञान के इस को करने की कभी कोशिश भी नहीं करनी चाहिए. पहले के जमाने में जितने भी ऋषि हुआ करते थे वो पूजा-पाठ और सिधिया किया करते थे और अपने चारो और एक सकारात्मक उर्जा का घेरा बना लिया करते थे. जिसकी वजह से उनकी साधना में कोई बाधा न आये. और जो व्यक्ति उनकी पूजा और सिधी में विघ्न डालने की कोशिश करता वह उस व्यक्ति को श्राप दे दिया करते थे. 

इसी लिए दोस्तों ये कहा भी गया है की किसी सीधे और सच्इचे न्सान को कभी रुलाना नहीं चाहिए वरना उसकी बद्दुआ लग जएगी. वो इसलिए क्योकि सीधे-साधे इन्सान के आस पास उसकी आत्मा "जो कि एक दिव्य उर्जा का स्वरुप है, की सकारात्मक उर्जा रहती है. और यही वजह भी होती है जिसकी वजह से उसके मन के की उर्जा उसके गलत करने वाले पर श्राप का काम करती है. वो कहते हैं न अच्छे व्यक्ति के साथ अच्छा और बुरे व्यक्ति के साथ बुरा ही होता है. वो इसी वजह से कहा जाता है.

हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपको  लगी हमको कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताये और अपनी प्रतिक्रिया नीचे दिए गए सन्देश बॉक्स से ज़रूर ज़ाहिर करें. आशा करते है की जल्दी ही आपके लिए अघोरी बाबा कि अजब गजब दुनिया से आप के लिए कुछ न कुछ नया लेकर आते रहे.