प्रदुषण के बढ़ने की वजह से Delhi NCR के सभी स्कुल करे गए बंद.

प्रदुषण के बढ़ने की वजह से Delhi NCR के सभी स्कुल करे गए बंद.

Environment Pollution Control Authority के निर्देशानुसार बुद्धवार तक दिल्ली एनसीआर के सभी स्कूलों को बंद रखा गया था.
 
इन दिनों दिल्ली-एनसीआर में हवा का जहरीलापन कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है. अभी कुछ दिन पहले ही Delhi NCR का इलाका स्मॉग की वजह से गैस चेंबर बन गया था और अब इसे फिर से जहरीले स्मॉग की मोटी चादर ने घेर लिया है. Environment Pollution Control Authority के निर्देशानुसार बुद्धवार तक दिल्ली एनसीआर के सभी स्कूलों को बंद रखा गया था. लेकिन गुरुवार को भी हालात में कुछ खास सुधार नहीं हुआ. क्या वजह है कि दिल्ली में फिर से बढ़ गया प्रदूषण का स्तर?. आइए जानते हैं.

दिल्ली में घुट रहा है दम क्योकि, दिल्ली में प्रदूषण फिर से लोगों का दम घोट रहा है. प्रदूषण के कारण सुबह और शाम के समय तो हालात बेहद ही खराब होते जाते हैं. आज गुरुवार को भी दिल्ली एनसीआर में AQI लेवल खतरनाक था. सुबह नौ बजे तक का AQI लेवल ही 470 था. वहीं System of Air Quality and Weather Forecasting And Research के अनुसार सुबह 9.30 बजे तक फरीदाबाद में AQI 441, गाज़ियाबाद में 481, ग्रेटर नोएडा में 469, गुरुग्राम में 427, नोएडा में 427 था.

दिल्ली में प्रदूषण का स्तर क्यों हुआ खतरनाक ?
मौसम विशेषज्ञों की मानें तो तापमान में कमी और हवा की गति ये दो कारण है कि प्रदूषक तत्व एक जहग इक्कठा हो गए हैं और प्रदूषण बढ़ गया है. इसके आलावा बादल छा जाने के कारण सूरज की रोशनी में भी कमी आ गई है. दिल्ली एनसीआर के प्रदूषण के गंभीर स्तर को देखते हुए सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूल गुरुवार और शुक्रवार को भी बंद रखे जाएंगे. इसी के साथ आईएमडी ने पश्चिमी राजस्थान, तमिलनाडु, पुद्दुचेरी और केरला में बारिश की संभावना जताई है. इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में भी भारी बर्फबारी होने के आसार है.

दिल्ली के बिगड़ते हालातों के कारण ना सिर्फ आम लोगों बल्कि जानवरों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है. जहरीली हवा के कारण फेंफड़ों पर जो बुरा असर पड़ रहा है उससे अस्थमा और कार्डियोवस्कुलर बीमारियां होने का खतरा बढ़ गया है. आम लोग तो मास्क का इस्तेमाल करके प्रदूषण के बुरे असर को फिर भी कम कर सकते हैं लेकिन जानवर आखिर जाए तो जाए कहां. बढ़ता प्रदूषण सभी के लिए हानिकारक है लेकिन देखना ये है कि हालात कब सुधरते हैं.