क्या है मोदी सरकार का ये नया “ई-सिगरेट अध्यादेश 2019” India

क्या है मोदी सरकार का ये नया “ई-सिगरेट अध्यादेश 2019” India

क्या है मोदी सरकार का ये नया “ई-सिगरेट अध्यादेश 2019”

मोदी सरकार समय समय पर देश की जनता के लिए नए-नए कानूनों को लागुकरती रही है और अब एक बार फिर से “ई-सिगरेट अध्यादेश 2019” को लागु कर के देश की युवा पीढ़ी के स्वास्थ्य और भविष्य को बचाने की पहल की है.

चलिए आपको बता देते है की ये ई-सिगरेट अध्यादेश आखिर क्या चीज़ है. लेकिन उससे पहले यह जानना ज़रूरी होगा की आखिर ये ई-सिगरेट क्या चीज़ है? ई-सिगरेट यानि की ENDS जिसका मतलब होता है “इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम” जिसमे बेटरी से चलने वाले उपकरण होते है जो शरीर में बिजली से निकोटीन पहुचने का कामकरते है और इसका सबसे ज्यादा उपयोग ई-सिगरेट के लिए किया जाता जा रहा है इसलिए इस सिगरेट को ई-सिगरेट कहा गया है मतलब “इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट” आम सिगरेट और ई-सिगरेट में इतना ही फर्क है की ई-सिगरेट में तम्बाकू नहीं होता और इसमें से धुआ नहीं निकलता. निकलता है तो सिर्फ भाप जो निकोटिन को भाप बना कर हमरे शरीर में पहुचती है. और लोगो का मानना यह है की ई-सिगरेट आम सिगरेट से कम खतरनाक है.

तो अब सवाल ये आता है की जब ई-सिगरेट आम सिगरेट से खतरनाक नहीं है तो इसको बैन क्यों किया जा रहा है? तो इसका जवाब ये है की आमतौर पर सिगरेट के मुकाबले भले ही ई-सिगरेटआम सिगरेट को सिगरेट को छोड़ने के काम आती हो लेकिन यह कहनापूरी तरह से सही नही होगा की यह पूरी तरह से शुर्क्षित है. क्योकि इस सिगरेट में तम्बाकू तो नहीं होता मगर इसमें निकोटीन का प्रयोग किया जाता है. और निकोटीन का आम उपयोग व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए जानलेवा साबित होता है. और इसी बात का खासा ख्याल रखते हुए मोदी सरकार ने ई-सिगरेट पर प्रतिबन्ध लगा दिया है. जिसका ज़िक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यक्रम “मन की बात” में रविवार 29-9-2019 को किया. और साथ ही ये भी बताया की युवाओं को लगता है की ई-सिगरेट पीने से कोई खतरा नहीं है लेकिन ये अवधारणा सही नहीं है.

और इसी ई-सिगरेट को भारत में रोकने के लिए “ई-सिगरेट अध्यादेश 2019” को लागु करा गया है जिसके अंतर्गत पहेली बार ई-सिगरेट का प्रयोग करने पर एक साल की जेलऔर एक लाख रुपय तक का जुर्माना देना पड़ेगा. और इसके बाद दूसरी बार इसका प्रयोग करते हुए पकडे जाने पर 5 लाख रूपए तक का जुर्माना और 3 साल तक की जेल की सजा होगी. और इसको किसी से किसी दुसरे व्यक्ति को खरीद के देने या लेन देन करने पर 50 हज़ार रूपए तक का जुर्माना और छ: महीनो के लिए जेल हो सकती है या फिर दोनों भी. इस कानून को बीते 19 सितम्बर 2019 को भारत की सभी जगहों में लागु कर दिया गया है.