मसूरी में सरकारी कर्मचारी काम के नाम पर हैं धब्बा.

मसूरी में सरकारी कर्मचारी काम के नाम पर हैं धब्बा.

आखिर कब तक सरकारी व्यवस्था इस तरह अपने काम कि ज़बानी मरम्मत करते रहेंगे.

जब भी किसी आम आदमी को अपने किसी काम के लिए सरकारी दफ्टर या ऑफिस जाना पड़ता है तो उसके दिमाग में आता है लम्बी-लम्बी लाइन और सरकारी ओफ्फिसरों का आलसपन. यही वजह भी है कि ज्यादातर लोग घर पर बैठे-बैठे ही अपने मोबाइल से जहां तक सम्भव हो सके अपना काम कर लेते हैं. फिर चाहे ऑनलाइन बैंक का काम हो या बिजली का बिल भरने का काम हो.

लेकिन अब सवाल ये उठता है कि अगर किसी सरकारी दफ्तर में कोई कर्मचारी किसी काम को करने बैठा है तो उसको शयद उस काम को करने में कोई आप्पति ना हो. परन्तु ऐसा नहीं है. अगर आप किसी सरकारी दफ्तर में अपना काम करवाने जाते हैं तो शायद आपको कुछ ऐसा सुनने को मिल जाये. जैसे कि सुबह 10 बजे आना और अगर गलती से सुबह 10 बजे चले गए तो शाम को 3 बजे के बाद आना. कुछ इस तरह सरकारी दफ्तर वाले अपने काम की कसीदे पढ़ते आपको नज़र आ जाएँगे.

आखिर कब तक सरकारी व्यवस्था इस तरह अपने काम कि ज़बानी मरम्मत करते रहेंगे. बात दरसल यह है कि उत्तराखंड कि राजधानी देहरादून से 44 किलोमीटर की दुरी पर मंसूरी में, इन दिनों मैं अपने काम के लिए पोस्टिंग हूँ. वही मुझको पोस्ट ऑफिस जाना पड़ा क्योकि मुझको अपने आधार-कार्ड से अपना मोबाइल नंबर अपडेट करवाना था. मसूरी स्थित “कुलड़ी” नमक जगह में यहाँ एक पोस्ट ऑफिस है जहां पर जा कर मुझको आपना आधार कार्ड से मोबाइल नंबर अपडेट करवाना था. लगभग “आज 14 जनवरी 2020” की दोपहर एक बजे के आस-पास में वहां पहुचा और इंक्वारी काउंटर पर पहुचने के बाद मेने पूछा, मैडम जी आधार कार्ड अपडेट किधर होगा, जवाब में मिलता है वो जो पीछे आप बेंच देख रहे हो वहां एक सर आएँगे अभी बहार गए हैं वही पर होगा.

एक बजे से तीन बज जाता है कोई नहीं आता, मेरे साथ एक और अजनबी साथी था जो अपने आधार कार्ड के काम के लिए ही वहां पर आया हुआ था. भाई यार 12 बजे का आया हुआ हूँ, अभी तक किसी को नहीं देखा. साथ ही पूछता हूँ कोई यहाँ पर आयेगा या नहीं तो बोलते हैं अभी थोड़ी देर में आ रहे हैं. और तो और लंच टाइम भी खतम हो गया. और शाम होने को है. लेकिन इस आधार काउंटर पर कोई नहीं आता.

लगभग साढ़े तीन बजे एक जनाब अंडर से चाय, समोसा, और अपने हाथों को मलते हुए आते हैं और पूछने पर बोलते हैं कल आना दो बजे अभी टाइम नहीं है. और जब मेने पूछा की क्यों मैं तो ऑफिसियल टाइम में आया हूँ, और आधार कार्ड अपडेट करवाने का काम समय शाम चार बजे तक है. तो जवाब में मिलता है. टाइम कितना भी हो लेकिन में नहीं करूंगा. कल सुबह 10 बजे आना अगर टाइम होगा तो कर दूंगा वरना जा के सामने SBI बैंक से करवा लो सामने वाला भी करता है यही काम. लेकिन हमारे यहाँ अभी हमको बहुत काम है.

दरसल काम कि बात करूँ तो पूरा पोस्ट ऑफिस खाली पड़ा था. एक पुरे पोस्ट ऑफिस में सिर्फ एक ही महिला काम करती हुई नज़र आ रही थी. हालाँकि जिन जनाब ने मेरा काम करना था उनका नाम में नहीं जनता लेकिन उन जनाब की फ़ोटो पोस्ट की शुरवाती फ़ोटो में दिखाई दे रही है. यह बात मसूरी स्थित कुलड़ी बजार वाले पोस्ट ऑफिस कि है. जो की काफी निराशाजनक है. जब तक हम अपने अधिकारों और काम के प्रति जागरूक नहीं होंगे तब तक देश आगे नहि बढेगा. जो की एक स्थान और स्थानीय लोगों के लिए शर्मनाक बात है.

यह बात स्थानीय प्रशासन और अधिकारिक लोगों के लिए मेरी तरफ से बेहद शर्मनाक है. एक और जहां सरकार मसूरी को पहाड़ों की रानी से सम्बोधित करती है, वही दूसरी तरफ अगर सरकारी व्यवस्था कि तरफ नज़र डालें तो एक दम पस्त नज़र आती है. जहां ज्यादा ठण्डा होने के कारण लोगो का काम करना और दिमागी माहोल बारह माह शायद बर्फ ही रहता है. जो कि देश के किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी को शोभा नहीं देता. और आम जनता को शर्मसार भी करता है.