तो पहाड़ों में घर-घर बनने वाले झोई-भात में छुपा है ये राज़.

तो पहाड़ों में घर-घर बनने वाले झोई-भात में छुपा है ये राज़.

यदि आप पहाड़ी हैं तो आपको ये ज़रूर पता होगा झोई-भात आखिर क्या है. 

झोई को गेहूं के आटे को भुन कर, दही, और घर के पिसे हुए मसलों द्वारा तैयार करा जाता है. जिसमे ऊपर से पालक के पत्तों को काट कर डाला जाता है. यह आमतौर पर घर में कढ़ी बनाने जैसा ही होता है. कई जगहों पर इसमें लोग पानी में रात भर भीगी हुई सोयाबीन की दाल को भी डालते हैं. जिसको पहाड़ों में "भट की दाल भी कहते हैं" इसको भात यानि चावल के साथ खाया जाता है. यह पहाड़ों के हिसाब से गरम होता है और पहाड़ी सर्द हवाओं से बचाता भी है, इसके साथ यह पेट को भी साफ़ रखता है. और गैस की परेशानी को भी दूर करता है.

भारत में आज हर कोई पहाड़ों में घुमने आना चाहता है और पहाड़ी खान-पान को भी बहुत पसंद करता है. भारत में आज उत्तराखंड के खान-पान और खाद्य सामग्री को स्वास्थवर्धक के तौर पर देश भर में अपनाया जा रहा है. और यदि बात करें तो उत्तराखंड के खान-पान को हर कोई अपने रोजाना की दिनचर्या में अपना सकता है जो की स्वास्थ्य के लिए बेहद अच्छा माना जाता है. यही वजह भी है जिसके कारण आज लोग उत्तराखंड के खानपान को अपना रहए हैं. पहाड़ों में रहने के कारण यह खाना पहड़ी लोगो के स्वस्थ के लिए और उनकी लम्बी आयु के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है.

अगली बार खान-पान से जुडी खास बातों में आपके लिए कुछ और भी ख़ास और स्वादिस्ट लेकर लेकर ज़रूर आएंगे. फ़िलहाल के लिए इतना ही. आप अपने पसंदीदा खानपान के बारे में हमको बता सकते है ताकि हम आपको उसके बारे में खास बता सके.

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