महाभारत काल से भी पुराना है दिल्ली का पुराना किला, आइये जानते है क्या है इसका राज़ .

महाभारत काल से भी पुराना है दिल्ली का पुराना किला, आइये जानते है क्या है इसका राज़ .

दिल्ही का पुराना किला और किलकारी वाले भेरों बाबा का मंदिर का इतिहास जो की जुड़ा है पांडवों के महाभारत काल से, आइये जानते हैं पूरी बात.

भारत की राजधानी दिल्ही में स्थित पुराना किला दिल्ही को और भी रोचक और पर्यटकों को हमेशा से ही आकर्षक करता रहा है. दिल्ही का ये पुराना किला तीस हज़ार साल से भी ज्यादा पुराना है. और उतने ही पुराने इस के राज़. अपने आप में बहुत  कुछ बयाँ करता दिल्ही का पुराना किला कभी किसी जमाने में पांडवों की नगरी हुआ करती थी. आज के समय में पुरानी दिल्ही कही जाने वाली जगह, जिस जगह पर पुराना किला मौजूद है उस जगह को किसी ज़माने में इन्द्रप्रस्थ के नाम से जाना जाता था. 

इस किले के बारे में कहा जाता है की पांडवों ने इस किले को खोजा था. जिस समय पांडवों ने इस किले को खोजा था उस समय ये किला पांच हज़ार साल पुराना था. यानि की महाभारत काल से भी पुराना यह किला था. कहा जाता है कि जब कौरव और पांडवों के बीच में उनकी पैत्रिक सम्पत्ति का बटवारा हुआ तो कौरवों ने धोके से पांडवों को इन्द्रप्रस्थ की बंज़र ज़मीं दे दी थी और राज्य हस्त्हिनापुर को खुद ले लिया था. और तब पांडवों को ये किला मिला था और यही से पांडवों ने इन्द्रप्रस्थ की बंज़र ज़मीं को पुनः जीवित कर इसको खुबसूरत और रहने लायक बनाया था. तभी से इस किले में कुछ अवशेष पांडवों के काल के भी मिलते हैं.

किले के पीछे मौजूद भेरों बाबा का मंदिर भी है. जिसकी कहानी महाभारत काल के समय से प्र्चल्लित है. जिसको किलकारी वाले बाबा कहा जाता है.

ऐसा माना जाता है कि पांडवों ने अपने किले की सुरक्षा हेतु कई बार यज्ञ का आयोजन किया था परन्तु राक्षस यज्ञ को बार बार भंग कर दिया करते थे. तब भगवान श्रीकृष्ण ने सुझाव दिया कि किले की सुरक्षा हेतु भगवान भेरों का, जोकि राक्षसों के सरदार थे, किले में स्थिपित किया जाये. जिससे राक्षस किले पर हमला नहीं करेंगे. तब भीम भैरों बाबा को लाने के लिए काशी यानि बनारस गये थे. और भीम ने बाबा की अराधना की और बाबा को इन्द्रप्रथ चलने का आग्रे किया तब बाबा ने भीम के समक्ष एक शर्त रखी और कहां कि वह जहां भी उन्हें पहले रख देगें वे वही विराजमान हो जाएंगे और वे वहां से आगे नहीं जायेगें. भीम ने यह शर्त मान ली और बाबा को अपने कंधे पर बिठा कर चल दियें. किले के पास आते ही भेरो बाबा ने माया कर दी और भीम को मजबूर होकर उन्हें अपने कंदे से नीचे ऊतराना पडा. तब भीम ने फिर से अराधना की और उनसे आगे चलना का आग्रे किया परन्तु बाबा आगे नहीं गये. भीम ने पुनः आग्रे किया और कहां की मैं अपने भाईयों को वचन दे कर आया हुँ कि आपको इन्द्रप्रथ लेकर आऊंगा इसलिए मेरी विनती है कि आप इन्द्रप्रस्थ चले. परन्तु बाबा आगे नहीं गये और भीम का मान रखने के लिए उन्हें भीम को किले की सुरक्षा हेतु अपनी जटा काट कर दे दी और कहां कि इन्हें किल में विस्थपित करे और मैं यहीं से किलकारी मार कर किले की सुरक्षा करूंगा और वहा स्थान आज किलकारी बाबा भैंरो नाथ मंदिर के नाम से जाना जाने लगा. 

इस मंदिरे में सच्चे मन और विचारों से जो भी व्यक्ति आता है बाबा उसकी मुराद ज़रूर पूरी करता है. किलकारी वाले भेरों बाबा को प्रशाद के रूप में दारू चढ़ाई जाती है. और बटुक भेरों को दूध जिनको दुध्धारी भेरों भी कहा जाता है. महाभारत काल से इस मंदिर की यहाँ स्थापना हुई तो इस वजह से दिल्ही की प्राचीनतम धरोहर में से एक यह मंदिर भी है. और यह मदिर ठीक पुराने किले के पीछे स्थित है. अगर आप दिल्ही आये तो पुराना किला और किलकारी वाले भेरों बाबा के दर्शन करने ज़रूर आये. फिलहार अघोरी बाबा के इस सफर में इतना ही उम्मीद है आपको ये जानकारी पसंद आई होगी.