52 सिध्पिठों में से एक है सुरकंडा देवी का मंदिर Tehri Ghadwal, Uttarakhand.

52 सिध्पिठों में से एक है सुरकंडा देवी का मंदिर Tehri Ghadwal, Uttarakhand.

52 सिध्पिठों में से एक है सुरकंडा देवी का मंदिर जाने विशेष महत्व “उत्तराखंड”

उत्तराखंड को देवों की भूमि यानि देवभूमि यूँ ही नहीं कहा जाता इसकी अपनी विशेषता और अपनी महत्वता है भारत के उत्तर में बसा हुआ उत्तराखंडदेश विदेश में अपनी संस्कृति और लोक सभ्यता के लिए सुप्रसिद्ध है. और यहाँ पर मौजूद तीर्थ स्थल भी अपने आप में विशेष महत्वपूर्ण है. और आज हम आपको एक ऐसे ही तीर्थ स्थान के बारे में बताने जा रहे है जिसका उल्लेख भारतीय पुराणों में भी पाया जाता है और माँ दुर्गा के 52 सिद्ध पीठों में से एक सिद्ध पीठ माना जाता है. जी हां हम बात कर रहे है माँ“सुरकंडा देवी”के मंदिर के बारे में जो की उत्तराखंड के टिहरी जनपद में स्थित जौनपुर के सुरकुत पर्वत पर स्थित है. जिसको माँ शक्ति यानि माँ दुर्गा भगवती का ही स्वरुप कहा जाता है. और यह मदिर 52 शक्तिपीठों में से एक मंदिर है.

लोक कथा और पौराणिक ग्रंथो के अनुसार इस स्थान पर माँ सती का शीश घरती पर गिरा था. इसी लिए इस स्थान को माँ सुरकंडा देवी के नाम से जाना जाता है. पौराणिक ग्रंथो के अनुसार जब भगवन शिव सती के जलते हुए शरीर को अपने हाथों में लेकर ब्रहम्मांड के चक्कर लगा रहे थे तब संसार को भगवन शिव के क्रोध से बचाने के लिए भगवन विष्णु ने अपने अशोक चक्र से माँ सती के देह के 52 हिस्से करे और तब शरीर का जो हिस्सा जिस जगह पर गिरा उस जगह पर एक शक्तिपीठ बना.

उसी में से माँ सती के सर का हिस्सा इस स्थान पर गिरा जिसकी वजह से यहाँ पर माँ शक्ति का स्थान बना जो की सुरकंडा देवी के नाम से जाना जाने लगा. कहा जाता है माँ भगवती यहाँ पर माँकाली के स्वरुप में विराजमान है जो की संसार के कल्याण के लिए आने वाले भक्तो को आशीर्वाद प्रदान करती हैं. केदारखंड और स्कन्द पुराण के अनुसार देवराज इंद्र ने यहाँ माँ माँ की उपासना कर के अपना खोया हुआ साम्राज्य वापस प्राप्त करा था. यह सिद्ध पीठ समुंद्र ताल से 3 हज़ार किलोमीटर की उचाई पर स्थित है और यहाँ से बद्रीनाथ, केदारनाथ, यमनोत्री और गंगोत्री चारो धामों की पहाड़िया भी दिखाई देती हैं.

हर साल यहाँ लाखो लोग टूरिस्ट, श्रद्धालु, आदि आते है और नवरात्रों के समय में यहाँ माता के दरबार में पूजा अर्चन हर समय चलती रहती है| और गंगा दशहरा वाले दिन मंदिर में पूजा करने से भक्तों की मनोकामना ज़रूर पूरी होती है. सर्दियों के समय जनवरी और फरवरी के महीने में ये पहाड़ी बर्फ से धक जाती है इसलिए यहाँ टूरिस्ट भी घुमने के लिए आते है. और नजदीक ही धनोल्टी भी स्थित है जो मंदिर परिसर में आने से पहलेपड़ता है यहाँलोग अपनी गर्मी की छुट्टियाँ मानाने के लिए आते है. धनोल्टी में कैम्पिंग और ट्रेकिंग जेसे एडवेंचर भी करने को मिल जाते है.

कैसे पहुचा:

सुरकंडा देवी मंदिर आने के लिए आपको अगर हवाई मार्ग से आना है तो देहरादून स्थित जोलिग्रांट से यह आयाजा सकता है वही नई तेहरी बस अड्डा से आपको यहाँ के लिए लोकल बस सुविधा भी मिल जएगी जो की मसूरी में 72 किलोमीटर की दुरी तय करने पर आप मन्दिर परिसर तक पहुच सकते हैं. वही ऋषिकेश से चंबा होते हुए 82 किलोमीटर की दुरी तय करने के बाद यहाँ तक पहुचा जा सकता है. यत्रियों के रुकने के लिए यहाँ धर्मशालाए भी मौजूद है जहाँ यात्री रात के समय में यदि रुकना चाहे तो रुक सकते है.

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