अविवाहित कन्या भी कर सकती हैं करवचोथ का व्रत.

अविवाहित कन्या भी कर सकती हैं करवचोथ का व्रत.

वैसे तो करवाचोथ का व्रत हमेशा सुहागिन महिलाये ही रखती हैं मगर जिन कन्यों की मंगनी हो गई हो वो भी इस व्रत को कर सकती है| और जिन कन्याओं का विवाह नहीं हो रहा वो भी एक सुयोग्य वर की कामना हेतु इस व्रत को रख सकती हैं| करवाचोथ का व्रत भारतीय महिलाओं के द्वारा अपने सुहाग की लम्बी आयु के लिए रखा जाता है| जिसमे सुबह सूरज की पूजा से ले कर शाम के चाँद की पूजा तक स्त्रियाँ निर्जल व्रत रखती हैं| और रात को चाँद निकलने के बाद चाँद कि पूजा कर के अपना व्रत खोलती हैं| और अपने सुहाग की लम्बी उम्र की कामना रखती हैं|पुराणों के अनुसार कहा जाता है कि चंद्रमा नक्षत्रों में रोहिणी नक्षत्र को अधिक प्रेम करता है। उसकी स्थिति इसी नक्षत्र पर होने से वह प्रेम प्रवर्धन योग बना रहा है। यह व्रत सुहागिनें अपने पति के मंगल और समृद्धि के लिए करती हैं। करवाचौथ के दिन 17 अक्टूबर को चंद्रोदय 7 बजकर 59 मिनट पर है। इसी समय अर्घ्य दिया जाएगा । और यह सबसे अच्छा सुयोग होगा सुहागिनों के लिए|