पुकार रहा है पौड़ी जिले का बिस्ताना गाँव अपने बाशिंदों को.

पुकार रहा है पौड़ी जिले का बिस्ताना गाँव अपने बाशिंदों को.

उत्तराखंड के पौड़ी जिले में बिस्ताना गांव सुनसान पड़ा है, वही अमेरिका की ओरेगन स्टेेट यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर सुषमा नैथानी जब बचपन की यादों को ताजा करने बिस्ताना गांव पहुंची तो सब कुछ उजड़ चुका था। यहां तक कि गांव वालों की वो साझा अमराई भी नदारद थी, जिसे यहां के बाशिंदों ने देश भर से लाए आमों की कितनी ही किस्मों के पौधों से तैयार किया था।

निर्जन गांव देखकर कुछ लोभी आए और आम के पेड़ों को काटकर चलते बने। पिछले दिनों नैथानी यह टटोलने बिस्ताना के सफर पर आई थीं कि पहाड़ की गोदी में बसे अपने पुश्तैनी घर को होम स्टे में तब्दील कर सकती हैं या नहीं। बिस्ताना इस तरह का इकलौता गांव नहीं है। राज्य में ऐसे करीब 1700 गांव हैं। सच तो यह है कि इंसानों के साथ-साथ अब देवता भी कूच करने लगे हैं! जो लोग स्कूल, रोजगार, अस्पताल जैसी सुविधाएं नहीं होने की वजह से अपने पारंपरिक ठौर छोड़कर जा चुके हैं, उन्होंने नए ठिकानों पर लोक-देवता भी स्थापित कर लिए हैं।

यानी, साल-दो-साल में इष्ट-देवताओं की पूजा के बहाने जो लौटना हो जाता था, उसकी संभावना भी बाकी नहीं रही। हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और देहरादून में पहाड़ों से पलायन कर चुके पहाड़ियों ने डेरे बना लिए हैं, वहीं उनके तमाम लोक देवता जैसे लाटा देवता, हरसेम, छुरमुल आदि के मंदिर भी स्थापित हो गए हैं। नौबत यह आई कि दो साल पहले उत्तराखंड सरकार ने ग्रामीण विकास और पलायन आयोग कायम किया, जिसकी चार रिपोर्टें अलग-अलग जिलों पर आ चुकी हैं। ये रिपोर्टें पलायन की दर्दनाक दास्तान सुनाती हैं।

आयोग के उपाध्यक्ष शरद सिंह नेगी कहते हैं कि पलायन के दर्द के बीच उम्मीद के अनेक चिराग भी रोशन हो रहे हैं। ऐसे अनेक युवा हैं जो पुश्तैनी घरों को होम स्टे में तब्दील करने के लिए लौट रहे हैं। ऐसे होम स्टे की संख्या 700 पार कर चुकी है। कुछ ऑर्गेनिक खेती, डेयरी-पोल्ट्री जैसे व्यवसाय अपना रहे हैं। पलायन की पीड़ा के बीच ऐसी कहानियां ही सुख का मरहम बन जाती हैं, और बरसों से दर्द भोगते आ रहे पहाड़ों को इनकी सचमुच दरकार है।

सरकार होमस्टे बनाने पर 30% सब्सिडी दे रही है। नतीजा यह है कि टिहरी बांध से 30 किमी दूर रानीचौरी गांव के एक पुराने घर को योग-मेडिटेशन रिजॉर्ट में बदला गया है। यहां सुकून सीखने चीन-जापान तक से लोग आ रहे हैं। पौड़ी के पाबौ ब्लॉक में अंतिका नेगी दिल्ली में फैशन डिजाइनर की नौकरी छोड़ लौट आई हैं और पोल्ट्री फार्म चला रही हैं।

Source Link :- https://www.bhaskar.com/national/news/1700-villages-deserted-in-uttarakhand-01609915.html