परेशानी सुलझाती नहीं बल्कि बडाती है उत्तराखंड पुलिस मसूरी.

परेशानी सुलझाती नहीं बल्कि बडाती है उत्तराखंड पुलिस मसूरी.

उत्तराखंड पुलिस मसूरी (झूलाघर) एक मोबाइल फ़ोन देने में कर रही थी आना-कानी, मरीज को ख़ुद आना पड़ा बीमारी की हालत में अपना फ़ोन लेने. 

(न्यूज़ रिपोर्ट मसूरी,Uttarakhnd.) Aghori BaBa. 7 अक्टूबर को देहरादून स्तिथ सिंघ्निवाला से चार लड़के अपनी गाड़ी में मसूरी घुमने के लिए जाते हैं. चारो के चारो दोस्त हैं. अचानक से गाड़ी के ब्रैक काम नहीं करते और गाड़ी अनियंत्रित हो जाती है. और गाड़ी मसूरी स्तिथ एक रास्ते पर खाई में गिर जाती है, जिस जगह ये घटना होती है उस घटना स्थल का नाम है "किमाडी" गाड़ी में बैठे हुए लड़कों का नाम है, मनोज, पंकज, नितिन, राहुल. चारो लड़के देहरादून में ही रहते हैं. एक्सीडेंट के दौरान सभी को मौके पर अस्पताल पहुचाया गया. उसके बाद जब पुलिस घटना का जायज़ा लेने के लिए मसूरी के उस अस्पताल में पहुची जहाँ दुर्घटना ग्रसित लडको को भर्ती करवाया गया था. तो उत्तराखंड पुलिस मसूरी ने पूछताछ के दौरान यूवकों के मोबाइल जप्त कर लिए और पुलिस स्टेशन में जमा कर लिए. जिसके बाद सभी लड़कों को सुरक्षित उनके अपने-अपने घर पहुचाया गया. ये थी अब तक की बात जो घटना से आप सभी को जोड़े हुए थी.

तो उसके बाद क्या हुआ आइये जानते हैं?

दरसल बात अब शुरू होती है जो की उन मोबाइल फ़ोन से जुडी हुई है जो मोबाइल फ़ोन पुलिस ने बातचीत के दौरान अपने पास जप्त कर लिए थे. नितिन नाम के लड़के से बातचीत के दौरान यह पता चला की, पुलिस वाले मोबाइल देने में आना-कानी कर रहे थे. मेरी तबियत ठीक न होने कि वजह से अगर मेरा फ़ोन कोई और लेने जाता था मेरे घर से, तो वो लोग उसको बहाना बना कर वापस भेज देते थे. काफी टाइम से ऐसा ही हो रहा था. उसके बाद एक दिन यानि 24/10/2019 को मुझको ख़ुद ही अपना फ़ोन लेने जाना पड़ा. जब मैं मसूरी माल रोड स्थित झूलाघर के पास पुलिस स्टेशन पहुचा तो मुझको मेरा ही फ़ोन नहीं दिया जा रहा था. नितिन बताते हैं कि, मुझको सुबह से शाम तक बैठाया रखा. और मेरे फ़ोन कि जगह किसी और दुसरे लोगों के फ़ोन दिखये जा रहे थे. जिसमे मेरा फ़ोन नहीं था. शाम को थाने के SHO ऑफिसर साहब पुलिस स्टेशन आते हैं. और उनसे बात करने के बाद ऑफिसर साहब अपने टेबल के दराज से मेरा फ़ोन निकाल कर मुझको देते हैं. और नितिन बताते हैं कि बीमारी की हालत में ही उनको मसूरी अपना फ़ोन लेने के लिए आना पड़ा. बल्कि मेरे घरवालों को भी ये फ़ोन दिया जा सकता था. मोबाइल कि कीमत लगभग 25 हज़ार की थी. जिसको नितिन को वापस दिया गया.

वैसे कहते हैं पुलिस हमारी सहायता के लिए है. और मौके पर हमारे काम आती है. लेकिन शायद यही वजह भी है कि लोग पुलिस वालों से मदत मांगते हुए भी कतराते हैं. मस्सूरी एक ऐसा टूरिस्ट प्लेस है जहां देश और विदेश से लोग अपनी छुट्टिय बिताने आते हैं. और किसी को भी किसी भी समय मदत की ज़रूरत पड़ सकती है. एसे में आप ख़ुद ही अंदाज़ा लगा सकते हैं कि यहाँ मौजूद पुलिस किस प्रकार से लोगो कि मदत करती है.

आप भी अपने शहर में हो रहे अत्याचारों को हमारे साथ साँझा कर सकते हैं.

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