इसलिए हम आज तक दिपावली के दिन मिट्टी से बने दियों को जलाते है.

इसलिए हम आज तक दिपावली के दिन मिट्टी से बने दियों को जलाते है.

दिपावली का त्यौहार आने वाला है. और हर साल हम बस इस एक त्यौहार के इंतजार में अपने आपको रोके रकते है, इस बात के साथ की दिवाली आने वाली है मतलब ढेर सारी शोपिंग. बाज़ार तरह तरह की साज सजावटों से सज जाता है. हम घरों में लाल, पीली, रंग-बिरंगी लडिया यानि चाइनीज़ लाइट लगते है और घर को पूरा सजाते है. लेकिन क्या हम दिपावली मनाते है या कोई लाइट जलाने वाला त्यौहार......? अगर गौर से सोचा जाये तो दिपावली का मतलब होता है दियो वाला त्यौहार. जिसमे मिट्टी से बनाये हुए दियो को जलाया जाता है.

क्या आप जानते है आखिर दिपावली के त्यौहार में मिट्टी से बने हुए दीयों को ही क्यों जलाया जाता है| नहीं तो चलिए आज हम आपको बताते है|
कहते है की दिपावली के दिन काली अमावास की रात होती है यानि अमावास पर चाँद नही होता और काली घनी अँधेरी रात होती है. और इस दिन हिन्दू धर्म के भगवान श्री राम चोदह वर्ष का वनवास ख़त्म कर के अयोध्या वापस लौटे थे. और अँधेरी काली रात होने के कारण भगवन श्री राम को कही मार्ग दर्शन में परेशान न हो इसलिए अयोध्या वासियों ने पुरे नगर में मिट्टी से बने हुए दियों को जलाया था और उत्सव मनाया था.

तभी से आज तक इस दिन को दिपावली के रूप में मनाया जाता है और दीयों को जलाया जाता है. इसलिए हम आज तक दिपावली के दिन मिट्टी से बने दियों को जलाते है. तो दोस्तों दिपावली को दियो के साथ मनाये और अपनी सभ्यता तो विलुप्त होने से बचाए.

27 October 2019 Dipawli Indian Festival