क्या योगी सरकार उत्तर प्रदेश की महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों को छुपा रही है.

क्या योगी सरकार उत्तर प्रदेश की महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों को छुपा रही है.

आखिर क्यों हो रहे है उत्तरप्रदेश में महिलाओं के खिलाफ इतने अपराध.

हाल ही में जारी "राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्योरो"(एन.सी.आर.बी.) कि ताज़ा जानकारी की अगर बात करें तो साल 2017 में 50 लाख 07 हज़ार 44 अपराध के मामले दर्ज़ किए गए थे. जिनमें से तीन लाख 59 हज़ार 849 मामले महिलाओं के खिलाफ अपराध संबंधित पाए गए थे. वहीं साल 2015 में महिलाओं के प्रति अपराध के 3 लाख 29 हज़ार 243 मामले दर्ज़ किए गए थे. 2016 में इस आंकड़े में 9 हज़ार 711 मामलों की बढ़ोतरी हुई और 3 लाख 38 हज़ार 954 मामले को दर्ज़ करवाया गया था. 

उत्तर प्रदेश की बात करें तो महिलाओं के प्रति अपराध के मामले सबसे ज़्यादा दर्ज़ हुए हैं. उत्तर प्रदेश में महिलाओं के प्रति अपराध के दर्ज़ मामलों की संख्या साल 2015 में 35 हज़ार 908 और साल 2016 में 49 हज़ार 262 थी. जबकि साल 2017 में कुल 56 हज़ार 11 मामले दर्ज़ किए गए थे. जिसका सीधा साधा इशारा समझा जाये तो हमारी राजनितिक सरकार और उत्तरप्रदेश की योगी सरकार पर निशाना साधा जाये तो, योगी राज़ में इतना सब क्यों घटित हुआ.

आखिर महिलाए ही क्यो ?

ज़्यादातर महिलाएं समाज और अपनी इज्जत की वजह से चुप रहती हैं, जिसका फायदा अपराधिक पुरुष उठाता है और अपराध के बाद भी खुले में घूमता रहता है. या कई बार ज्यादा जानकारी न होने कि वजह से भी महिलाओं को अपराध का शिकार होना पड़ता है. और स्वयं के लिए आवाज़ उठाने पर भी कतराती है. और अपराध की शिकार बनती जाती है. इसलिए भारत में महिलाओं के खिलाफ ज्यादा अपराध दर्ज कराए जाते हैं.

कैसे महिला अपने लिए जागरूक हों ?

सबसे पहले महिलाओं को अपने प्रति हो रहे अपराधों के खिलाफ आवाज़ उठाना सिखाना होगा. उसके बाद महिला सुरक्षा के लिए बनाये गए नियमों और कानूनों की सही सही और पूरी जानकारी होना भी बेहद ज़रूरी है. यदि अपने अधिकारों के बारे में महिलाओं को जानकारी नहीं होगी तो अपराध यूँ ही बढ़ता रहेगा और हर बार महिला इसका शिकार होती रहेंगी. अगर देश की महिलाये पढ़ी-लिखी होंगी तो अपने खिलाफ हो रहे अत्याचारों को कम कर सकती है. और घरेलु हिंसा, ऑफिस में हो रहे अभाद्र्व्यवाहर, सड़कों पर हो रहे छेड़-छड के खिलाफ भी आवाज़ उठा पायेगी. 

महिला सुरक्षा के लिए,

प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल हरासमेंट एक्ट 2013,  महिला संरक्षण अधिनियम,  आदि अधिकारों को अपनी सुरक्षा के लिए महिला इस्तेमाल कर सकती है.

News Reprter: Rishabh Bhardwaj

you can write for us.

Email Us: [email protected]

theaghoribaba.com