लोक कला की एक स्थानिय शैली ऐपण आखिर क्या है? Uttarakhand.

ऐपण का अर्थ लीपने से होता है और लीप शब्द का अर्थ अंगुलियों से रंग लगाना होता है. जिसके लिए ऐपण शब्द का इस्तेमाल करा जाता है.

आख़िर क्या है इस बार के सूरजकुंड मेले में ख़ास.

इस बार का सूरजकुंड हस्थशिल्प मेला हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर आयोजित करा गया है. जहां पर आपको हिमाचल प्रदेश से जुडी सभ्यता की एक झलक ज़रूर देखने को मिलेगी.

A century of heritage hidden in these caves of Ajanta.

Ajanta caves were first discovered in the 19th century by a British officer in the year 1819 while they were hunting.

जाने आखिर कियों होती है 12 साल बाद नंदा देवी की राजजात. Chamoli Ghadwal Uttarakhand.

नंदा देवी की यह यात्रा दो प्रकार की होती है एक वार्षिक यात्रा और दूसरी राजजात जो बारह साल बाद आयोजित करी जाती है. मान्यताओं के अनुसार देखा जाये तो नंदा देवी की यह अनोखी यात्रा चमोली जिले के कासुवा से शुरू होती है.

आखिर क्यों मनाया जाता है धनतेरस, जाने पूरी बात जब मिला था लक्ष्मी को 12 साल का श्राप.

धनतेरस को हमेशा कार्तिक कृ्ष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन मनाया जाता है. इस दिन देवी लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा जाती है. इस दिन को मनाने के पीछे धनवंतरी के जन्म लेने की कथा के अलावा, इसके बारे में एक दूसरी कहानी भी प्रचलित है.

इस जगह पर करती हैं मां श्याम सुन्दरी जाग्रत अवस्था में विराजमान.

मंदिर की स्थापना के दौरान पुजारी परिवार की माने तो उनका कहना है की माँ श्याम्सुन्दरी की मूर्ति यहाँ पर पहले से ही मौजूद थी

इसलिए हम आज तक दिपावली के दिन मिट्टी से बने दियों को जलाते है.

अँधेरी काली रात होने के कारण भगवन श्री राम को कही मार्ग दर्शन में परेशानी न हो इसलिए अयोध्या वासियों ने पुरे नगर में मिट्टी से बने हुए दियों को जलाया था जाने पूरी बात.

अविवाहित कन्या भी कर सकती हैं करवचोथ का व्रत.

जिन कन्याओं की मंगनी हो गई हो वो भी इस व्रत को कर सकती है| और जिन कन्याओं का विवाह नहीं हो रहा वो भी एक सुयोग्य वर की कामना हेतु इस व्रत को रख सकती हैं|