जाने उत्तराखंड में किस स्थान पर हुआ था शिव-पार्वती विवाह.

आज भी इस मंदिर में शिव विवाह की निशानियां यहां मौजूद हैं. इस मंदिर की मान्यता को देखते हुए यहां कई सितारे परिणय सूत्र में बंध चुके हैं.

Why Kerala is a famous tourist destination of South India

When to go to Kerala is the big question that revolves in the mind of every tourist. Except the peak season of visiting Kerala.

कम खर्चे में कैसे पहुचे दिल्ली से नेपाल.

नेपाल जाने के लिए किन किन चीजों की ज़रूरत पड़ती है आइये हम आपको बताते हैं.

मसूरी आयें तो इन जगहों पर ज़रूर घुमे. Dehradun Uttarakhand.

यह जगहे मसूरी की वो जगह है जहां आप नहीं गए तो आपने हकीक़त में मंसूरी घुमा ही नहीं फिर तो.

मध्यमहेश्वर मंदिर में होती है भगवान शिव कि नाभी कि पूजा.

मध्यमहेश्वर भगवान शिव को समर्पित मंदिर पंचकेदार के तीसरे स्थान पर आता है. जिसको कब बनाया गया था यह बात आज तक अज्ञात है.

कम खर्चे में घूमिये इन चार जगहों पर. "उत्तराखंड-हिमाचल"

यदि आप घुमने फिरने के शोकिन हैं तो चलिए आपको बतातें हैं की आप कम खर्चे के साथ अपने सफ़र का आनंद केसे ले.

धरती का कार्य पूर्ण होने के बाद सबसे पहला यग हुआ था प्रयाग में (इलाहाबाद).

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश के बड़े जनपदों में से एक है. यह गंगा, यमुना तथा गुप्त सरस्वती नदियों के संगम पर स्थित है. संगम स्थल को त्रिवेणी कहा जाता है एवं यह हिन्दुओं के लिए विशेषकर पवित्र स्थल है.

दिल्ली में शुरू हुआ 39वा इंडिया इंटरनैशनल ट्रेड फेयर (व्यापार मेला) 2019.

इस बार ऑनलाइन और दिल्ली-एनसीआर के चुनिंदा मेट्रो स्टेशनों में टिकट मिलेंगे. परन्तु प्रगति मैदान मेट्रो स्टेशन पर कोई टिकट विंडो नहीं होगी. हर बार यहाँ ज्यादा ट्रैफिक होने के कारण इस बार ये नियम लागू करा गया है.

क्या आप जानते हैं बुढा केदारनाथ धाम के बारे में? नहीं तो चलिए हम आपको बताते हैं, Uttarakhand, India.

पुराने समय में कहा जाता था कि केदारनाथ धाम की यात्रा शुरू करने से पहले यहाँ बुढा केदार धाम के दर्शन करने श्रद्धालु आते थे. जिसके बाद बाबा केदारनाथ धाम की यात्रा शुरू करी जाती थी.

महाभारत काल से भी पुराना है दिल्ली का पुराना किला, आइये जानते है क्या है इसका राज़ .

इस किले के बारे में कहा जाता है की पांडवों ने इस किले को खोजा था. जिस समय पांडवों ने इस किले को खोजा था उस समय ये किला पांच हज़ार साल और पुराना किला था. यानि की महाभारत काल से भी पुराना यह किला था. कहा जाता है कि जब कौरव और पांडवों के बीच में उनकी पैत्रिक सम्पत्ति का बटवारा हुआ तो कौरवों ने धोके से पांडवों को इन्द्रप्रस्थ की बंज़र ज़मीं दे दी थी और राज्य हस्तिनापुर को खुद ले लिया था.

52 सिध्पिठों में से एक है सुरकंडा देवी का मंदिर Tehri Ghadwal, Uttarakhand.

उत्तराखंड को देवों की भूमि यानि देवभूमि यूँ ही नहीं कहा जाता इसकी अपनी विशेषता और अपनी महत्वता है भारत के उत्तर में बसा हुआ उत्तराखंडदेश विदेश में अपनी संस्कृति और लोक सभ्यता के लिए सुप्रसिद्ध है|

महाभारत के अश्वत्थामा की जन्म भूमि है टपकेश्वर मंदिर देहरादून.

कहा जाता है की एक बार अश्वत्थामा ने अपनी माता से दूध पिने की जिद करी घर में दूध न होने के कारण निराशा से अश्वथामा ने भगवान शिव की बालकपन में पूजा करी और भगवान शिव ने अश्वथामा की तपश्या से खुश हो कर गुफा से दूध की धारा बहा दी थी.

केदारनाथ जितना ही पुराना इतिहास है रुद्रप्रयाग के तुंगनाथ का.

तुंगनाथ के इतिहास के साथ साथ जाने कैसे पहुचे तुंगनाथ के सफर पर और अपने सफर को बनाये मजेदार और रोमांचित.